नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बच्चों के पासपोर्ट नियमों में एक बड़ा और राहत भरा बदलाव किया है। नए संशोधन के तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जारी होने वाला 36 पेज का सामान्य पासपोर्ट अब 18 साल की उम्र या 5 साल तक (जो भी पहले हो) वैध रहेगा।
इस संबंध में ‘पासपोर्ट नियम संशोधन नियम, 2026 को भारत के राजपत्र (Gazette of India) में प्रकाशित कर दिया गया है, जिसके जरिए 1980 के मूल नियमों में बदलाव किए गए हैं।
क्या बदला है?
पहले 15 साल से कम उम्र के बच्चों का पासपोर्ट या तो 5 साल के लिए या उनके 15 साल के होने तक (इन दोनों में से जो पहले आए) वैध होता था। उदाहरण के लिए, यदि कोई बच्चा 14 साल की उम्र में पासपोर्ट बनवाता था, तो उसकी वैधता सिर्फ 1 साल यानी 15 साल की उम्र तक ही रहती थी।
अब नए नियमों के अनुसार, 15 साल से कम उम्र के बच्चों का पासपोर्ट अब सीधे 18 साल की उम्र तक वैध माना जाएगा। बशर्ते 5 साल की अवधि पहले पूरी न हो रही हो।
इसे ऐसे समझे
यदि कोई बच्चा 14 साल की उम्र में पासपोर्ट के लिए आवेदन करता है, तो नए नियम के तहत उसका पासपोर्ट अब 18 साल की उम्र तक वैध रहेगा। हालांकि, यदि आवेदन के समय बच्चे की उम्र बहुत कम है, तो 5 साल की अवधि और 18 वर्ष की आयु—इन दोनों में से जो सीमा पहले पूरी होगी, पासपोर्ट की वैधता वहीं समाप्त हो जाएगी।
बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को मिलती रहेगी 10% छूट
पासपोर्ट के नए नियमों और शुल्क व्यवस्था के बीच सरकार ने राहत का दायरा बरकरार रखा है। 8 साल से कम उम्र के बच्चों और 60 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) को नए पासपोर्ट आवेदन पर 10% की छूट मिलती रहेगी। यह छूट केवल नए पासपोर्ट आवेदन पर लागू होगी, पासपोर्ट री-इश्यू (दोबारा जारी) कराने पर इसका लाभ नहीं मिलेगा।
नई शुल्क व्यवस्था के दायरे में सामान्य पासपोर्ट के अलावा तत्काल सेवा, पासपोर्ट नवीनीकरण (Renewal), खोए या खराब हुए पासपोर्ट को बदलना और पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) जैसी तमाम महत्वपूर्ण सेवाएं भी शामिल हैं।