Indore में Rahul Gandhi के कार्यक्रम से पहले ‘Jhooth Ki Goonj’ के पोस्टर, QR Code से खुल रही वेबसाइट, जानें क्या है मामला

Indore में Rahul Gandhi के कार्यक्रम से पहले ‘Jhooth Ki Goonj’ के पोस्टर, QR Code से खुल रही वेबसाइट, जानें क्या है मामला

इंदौर। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले इंदौर में ‘झूठ की गूंज’ नाम से पोस्टर लगाए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शहर के कई प्रमुख चौराहों पर लगाए गए इन पोस्टरों में राहुल गांधी की तस्वीर के साथ ‘झूठ की गूंज’ लिखा गया है। पोस्टरों पर QR Code भी दिया गया है, जिसे स्कैन करने पर ‘Jhooth Ki Goonj’ वेबसाइट खुलती है।

वेबसाइट अपने होमपेज पर राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ से जुड़ी चार रैलियों के 40 दावों की जांच का दावा करती है। वेबसाइट के अनुसार इनमें 29 दावों को False और 11 को Misleading बताया गया है और कुल 169 स्रोतों का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, ये वेबसाइट द्वारा दिए गए अपने निष्कर्ष हैं; इन्हें स्वतंत्र फैक्ट-चेक का निष्कर्ष मानने से पहले प्रत्येक दावे और उसके मूल स्रोत की अलग-अलग जांच जरूरी है।

कहां-कहां लगाए गए ‘झूठ की गूंज’ पोस्टर?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंदौर के कई प्रमुख इलाकों और चौराहों पर रात के समय ये पोस्टर लगाए गए। इनमें गीता भवन, पलासिया समेत शहर के अन्य प्रमुख स्थान शामिल बताए गए हैं। पोस्टरों के जरिए लोगों को QR Code स्कैन कर वेबसाइट पर राहुल गांधी के कथित दावों से जुड़ी सामग्री देखने के लिए निर्देशित किया गया है।

वेबसाइट पर क्या है?

‘Jhooth Ki Goonj’ वेबसाइट के अनुसार उसने राहुल गांधी की कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में हुई चार रैलियों से जुड़े 40 दावों की जांच की है। वेबसाइट इन दावों के जवाब में सरकारी वेबसाइटों, संसद से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य प्रकाशित स्रोतों को संदर्भ के तौर पर प्रस्तुत करती है।

वेबसाइट के मुताबिक उसके वर्गीकरण में किसी दावे को ‘False’ तब माना जाता है जब उपलब्ध रिकॉर्ड उसका सीधे तौर पर खंडन करता हो, जबकि ‘Misleading’ का इस्तेमाल ऐसे दावों के लिए किया गया है जिनमें वास्तविक आंकड़ों को संदर्भ से अलग या अलग तरीके से प्रस्तुत किए जाने का उसका आकलन है।

वेबसाइट के पीछे कौन है?

‘Jhooth Ki Goonj’ वेबसाइट के संचालक या निर्माता की पहचान सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में इसे Gen-Z से जुड़े लोगों द्वारा बनाया गया बताया गया है, लेकिन ऐसी पहचान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वेबसाइट के कथित Gen-Z creators से जुड़े दावों को अपुष्ट बताया है।

वेबसाइट को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जरूर सामने आई हैं। BJP नेताओं ने इसे राहुल गांधी के दावों का जवाब देने वाला प्लेटफॉर्म बताया है, जबकि कांग्रेस की ओर से इसे BJP से जुड़ा राजनीतिक अभियान बताया गया है। दोनों पक्षों के इन दावों को अलग-अलग राजनीतिक दावों के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि वेबसाइट के वास्तविक संचालकों की सार्वजनिक पहचान स्पष्ट नहीं है।

पोस्टरों पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया

पोस्टर सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया और कई स्थानों से पोस्टर हटाए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले राजनीतिक माहौल प्रभावित करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया गया। दूसरी ओर, पोस्टर लगाने वाले लोगों या संगठन की आधिकारिक पहचान अभी स्पष्ट नहीं हुई है।

राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम युवाओं और छात्रों से जुड़े शिक्षा, रोजगार तथा अन्य मुद्दों पर संवाद के लिए आयोजित किया गया है। ऐसे में कार्यक्रम से पहले सामने आया ‘झूठ की गूंज’ अभियान इंदौर में राजनीतिक टकराव का नया मुद्दा बन गया है।

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